नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद सिर्फ शेयर बाजार ही रॉकेट नहीं हुए। सोने और चांदी को भी पंख लग गए। मिडिल ईस्ट में शांति वार्ता की खबरों से क्रूड ऑयल सस्ता हुआ। इसने बाजारों में नई जान फूंक दी। तेल की गिरती कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को कम किया है। इससे केंद्रीय बैंकों के लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रखने का जोखिम कम हो गया है। इसी का असर सोने पर दिखाई दिया। यह एक बार फिर 3,900 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। चांदी में भी 2.5 फीसदी की बड़ी उछाल देखी गई। उधर, शेयर बाजार में आई तेजी ने निवेशकों की संपत्ति 8 लाख करोड़ रुपये बढ़ा दी। सोने-चांदी में शानदार रिकवरी सोमवार को कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने रिकवरी की। पिछले सत्र की गिरावट से उबरते हुए इनमें अच्छी बढ़त दर्ज की गई। स्पॉट गोल्ड में 0.8 फीसदी की तेजी आई। यह 3,903.90 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स 0.4 फीसदी चढ़ा। यह बढ़कर 3,913.20 डॉलर प्रति औंस हो गया। पिछले सत्र में सोना 3.5 फीसदी टूटा था। यह टूटकर अक्टूबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। सोने के साथ चांदी में भी बड़ा उछाल देखा गया। चांदी 2.5 फीसदी की छलांग लगाकर 50.33 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। तेजी के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर सोने-चांदी में इस रिकवरी के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी है। दोहा में ईरान और कतरी मध्यस्थों के बीच हुई वार्ता से युद्ध विराम की उम्मीदें जगी हैं। इससे WTI क्रूड 3 फीसदी से ज्यादा टूटा। यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया। तेल की कीमतें कम होने से ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर कम हुआ है। इससे फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में आगे आक्रामक बढ़ोतरी की आशंका घट गई है। सोने पर चूंकि कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलती है। लिहाजा, कम ब्याज दर का माहौल और गिरती बॉन्ड यील्ड्स इसे निवेशकों के लिए फिर से आकर्षक बना रहे हैं। आगे ये फैक्टर तय करेंगे चाल बुलियन (सोने-चांदी) मार्केट पर आने वाले दिनों में अमेरिकी पॉलिटिक्स और आर्थिक आंकड़ों का सीधा असर देखने को मिलेगा। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिड-टर्म इलेक्शंस पर निवेशकों की बारीक नजर है। प्रिडिक्शन मार्केट्स के अनुसार, चुनावों के नतीजों का असर अमेरिकी डॉलर के एक्सचेंज रेट्स और फिस्कल पॉलिसी पर पड़ेगा। अगर डॉलर में कमजोरी आती है तो सोने को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, निवेशकों की नजर आगामी अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के साथ फेड अधिकारियों के बयानों पर टिकी है। 8 लाख करोड़ हुए जेब के अंदर पिछले सत्र में टेक शेयरों में आई बड़ी गिरावट के चलते निवेशकों को मार्जिन कॉल पूरा करने के लिए सोना बेचना पड़ा था। इससे सोना 4,000 डॉलर के निचले स्तर तक गिर गया था। हालांकि, सोमवार को आउटलुक पूरी तरह बदल गया। कच्चे तेल में नरमी और सोने-चांदी के संभलने से शेयर बाजार के निवेशकों का भरोसा भी वापस लौटा। इससे सेंसेक्स 1,233 अंक उछल गया। निफ्टी 23,400 के पार बंद हुआ। शेयर बाजार में आई इस 8 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी ने साफ कर दिया कि कीमती धातुओं में स्थिरता आते ही पूरे वित्तीय बाजारों का सेंटिमेंट पॉजिटिव हो जाता है। लेखक के बारे में अमित शुक्ला अमित शुक्ला नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर हैं। उनका पत्रकारिता में 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, फॉरेन ट्रेड, शेयर मार्केट, रियल एस्टेट, राजनीति, देश-विदेश, फीचर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। उनके पास पत्रकारिता और जनसंचार में डॉक्टरेट (PhD) की डिग्री है। टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड (TIL) में उनका सफर जनवरी 2018 में शुरू हुआ। TIL में रहते हुए नवभारत टाइम्स (डिजिटल) से पहले उन्होंने इकनॉमिक टाइम्स (डिजिटल) में सेवाएं दीं। पत्रकारिता का अनुभव अमित शुक्ला के पास डिजिटल के साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का लंबा अनुभव है। TIL से जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, डीएलए जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण (नोएडा) में सेंट्रल डेस्क पर उन्होंने करीब एक दशक बिताया। यहीं से उनके करियर की शुरुआत भी हुई। पहले वह फ्रीलांसर के तौर पर जागरण समूह की फीचर टीम से जुड़े थे। फिर सेंट्रल डेस्क का अहम हिस्सा बने। जाने-माने संस्थानों में अध्यापन अमित शुक्ला ने जाने-माने मीडिया संस्थानों के अलावा देश के नामचीन शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं। लिंग्विस्ट के तौर पर खास पहचान अमित शुक्ला ने लिंग्विस्ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, ऑस्ट्रियन इकोनॉमिक सेंटर, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया। अवार्ड/अचीवमेंट ET एक्सीलेंस अर्वाड्स 2019 रिसर्च फेलो (मीडिया) - ग्रैफनाइल रिसर्च कीनोट स्पीकर - चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (उन्नाव कैंपस) ... और पढ़ें