ETV Bharat / health ओमेगा-3 फैटी एसिड (खासकर DHA) मस्तिष्क की कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली के लिए बहुत जरूरी हैं. लेकिन, सिर्फ इसलिए कि मस्तिष्क को इनकी जरूरत... क्या सच में ओमेगा-3 सप्लीमेंट अल्जाइमर के खतरे को कम करने और याददाश्त को बेहतर बनाने में मददगार हैं? ( GETTY IMAGES ) By ETV Bharat Health Team Published : November 2, 2026 at 12:35 PM IST 6 Min Read हम सभी जानते हैं कि मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और याददाश्त कम होने से रोकने के लिए जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है. हालांकि, आम लोगों के बीच यह धारणा काफी प्रचलित है कि ओमेगा-3 या फिश ऑयल सप्लीमेंट लेने से याददाश्त बढ़ सकती है और उम्र के साथ होने वाली याददाश्त की कमी को रोकने में मदद मिल सकती है. इन्हें दिमाग से जुड़ी समस्याओं के लिए एक आसान उपाय के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है. हालांकि, एक नए अध्ययन ने इस धारणा को पूरी तरह से चुनौती दी है. अध्ययन क्या कहता है? अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के 'केक स्कूल ऑफ मेडिसिन' के शोधकर्ताओं ने 55 से 80 वर्ष की आयु के 365 लोगों को शामिल करते हुए दो साल तक एक विस्तृत अध्ययन किया. इन सभी प्रतिभागियों में अल्जाइमर रोग होने का हाई रिस्क था. अध्ययन में, एक समूह को रोजाना ऐसे सप्लीमेंट दिए गए जिनमें 2,000 मिलीग्राम DHA (एक ओमेगा-3 फैटी एसिड) था, जबकि दूसरे समूह को 'प्लेसबो' (बिना किसी चिकित्सीय लाभ वाली गोली) दी गई. इसके परिणाम दो साल बाद प्रकाशित किए गए. यह सच है कि जो लोग नियमित रूप से ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेते थे, उनके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में DHA का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया. लेकिन, प्लेसीबो (दवा जैसी दिखने वाली लेकिन बेअसर चीज) लेने वालों की तुलना में, याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता (कॉग्निटिव फंक्शन), या मस्तिष्क के सिकुड़ने (ब्रेन एट्रोफी) को रोकने के मामले में कोई खास अंतर नहीं दिखा. दूसरे शब्दों में, सप्लीमेंट के मस्तिष्क तक पहुंचने के बावजूद, दो साल बाद दोनों समूहों (DHA लेने वाले और प्लेसीबो लेने वाले) के बीच सोचने-समझने की क्षमता और याददाश्त के टेस्ट के नतीजों में कोई फर्क नहीं था. DHA सप्लीमेंट लेने वालों की याददाश्त या सोचने-समझने की क्षमताओं में कोई सुधार नहीं हुआ. इस शोध से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल हाई-डोज ओमेगा-3 (DHA) सप्लीमेंट या फिश ऑयल कैप्सूल लेने से अल्जाइमर रोग का खतरा कम नहीं होता है. शोधकर्ताओं का सुझाव है कि केवल ओमेगा-3 सप्लीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय, एक व्यापक तरीका अपनाना, जैसे कि 'मेडिटेरेनियन डाइट' का पालन करना और नियमित रूप से व्यायाम करना, मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है. डॉक्टर की राय क्या है? पी.डी. हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. कौस्तुभ महाजन बताते हैं कि ओमेगा-3 फैटी एसिड (खासकर DHA) मस्तिष्क की कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली के लिए बहुत जरूरी हैं. वे कहते हैं कि लेकिन, सिर्फ इसलिए कि मस्तिष्क को इनकी जरूरत होती है, इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें गोली के रूप में लेने से याददाश्त बेहतर हो जाएगी या अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से बचाव होगा. वे आगे समझाते हैं कि मस्तिष्क कोई ऐसी मशीन नहीं है जो किसी खास पोषक तत्व के मिलने भर से बेहतर तरीके से काम करने लगे. बल्कि, इसका कामकाज कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें रक्त प्रवाह, मेटाबॉलिज्म, नींद और व्यायाम शामिल हैं. इसी तरह, कल्याण के फोर्टिस हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर, डॉ. राकेश लाला कहते हैं कि हालांकि ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स को अक्सर याददाश्त और एकाग्रता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि ये लगातार याददाश्त को बेहतर बनाते हैं या डिमेंशिया को रोकते हैं. किस चीज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए? स्मृति हानि को रोकने के लिए गोलियों की तलाश करने के बजाय, हमारी दैनिक जीवनशैली में कुछ स्वस्थ बदलाव करना आवश्यक है, जैसे कि... स्वस्थ खान-पान की आदतें: ओमेगा-3 प्राकृतिक रूप से मछली, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी के बीजों जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है. पर्याप्त व्यायाम और नींद: व्यायाम और गहरी नींद मस्तिष्क की कोशिकाओं को आराम दे सकती हैं और उन्हें फिर से तरोताजा कर सकती हैं. बीमारियों का प्रबंधन: हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को सही ढंग से नियंत्रित किया जाना चाहिए. खुद से गोलियां लेने के खतरे डॉ. राकेश लाला चेतावनी देते हैं कि बिना उचित चिकित्सीय सलाह के ओमेगा-3 टैबलेट का अत्यधिक सेवन करने से पेट खराब होना, सीने में जलन और दस्त जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं. विशेष रूप से, जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, यदि वे ऐसे सप्लीमेंट का सेवन करते हैं, तो उनमें ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए, बेहतर यही है कि अपनी मर्जी से किसी भी तरह का न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट लेने से बचें. उचित चिकित्सा सलाह आवश्यक है स्मृति हानि केवल बुढ़ापे का परिणाम नहीं है. बल्कि, यह गंभीर तनाव, नींद की कमी या शरीर में किसी अन्य अंतर्निहित समस्या के कारण भी हो सकती है. इसलिए, यदि आपको याददाश्त में बदलाव या सुस्ती का अनुभव होता है, तो तुरंत दवाइयों का सहारा लेने के बजाय, वास्तविक कारण का पता लगाने और उसे ठीक करने के लिए किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श करना सही तरीका है. अध्ययन: https://www.thelancet.com/journals/ebiom/article/PIIS2352-3964(26)00198-2/fulltext https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5032683/ (डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा.) ये भी पढ़ें- क्या लाइफस्टाइल में बदलाव करके ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को किया जा सकता है कम? जानें रोजमर्रा की किन आदतों का पड़ता है सबसे ज्यादा असर? फ्रैक्चर होने से पहले ऑस्टियोपोरोसिस की जांच कराना क्यों है जरूरी? जानिए बोन-डेंसिटी स्कैन कैसे करता है काम जानिए वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस के वे लक्षण जिन्हें आपको भूलकर भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज world stroke day 2026: 30-35 की उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं Brain Stroke के मामले? जानिए शुरुआती संकेत और बचाव के उपाय क्या खाना पकाने वाले तेल को बार-बार गर्म करने से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर भारत में कम उम्र की महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा हैं ब्रेस्ट कैंसर, जानिए देश में इस बीमारी के बढ़ने के पीछे क्या है कारण ? मसाज गन का गलत तरीके से इस्तेमाल हो सकता है बेहद खतरनाक! डॉक्टर से जानिए शरीर के किन अंगों पर नहीं करना चाहिए यूज For All Latest Updates