अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन ने दावा किया है कि नेतन्याहू की प्रेशर की वजह ट्रंप ईरान पर परमाणु हमला कर सकते हैं। वॉशिंगटन: अमेरिका के प्रभावशाली पत्रकार, टीवी होस्ट और राजनीतिक रूढ़िवादी टकर कार्लसन ने दावा किया है कि 'नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन कुछ ही दिनों में ईरान पर परमाणु हमला करने वाला है।' उन्होंने ये सनसनीखेज दावा उस वक्त किया है जब ईरान और अमेरिका के बीच फिर से युद्ध की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं और ऐसा माना जा रहा है कि मिडटर्म इलेक्शन के बाद ट्रंप फिर से ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं। टकर कार्लसन ने परमाणु हमले को लेकर क्या दावा किया? इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन कुछ ही दिनों में ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है। इसका निशाना मध्य ईरान में स्थित 'पिकैक्स माउंटेन' होगा जहां इजरायली खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरानी सरकार ने अपना परमाणु संवर्धन कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया है। अमेरिकी जखीरे में मौजूद कोई भी पारंपरिक हथियार 300 फीट ठोस ग्रेनाइट चट्टान को भेदकर उन सुरंगों को नष्ट नहीं कर सकता जहां कथित तौर पर यह परमाणु संवर्धन हो रहा है। ऐसे में एकमात्र सैन्य विकल्प परमाणु हमला ही बचता है। नेतन्याहू लगातार इसके लिए जोर दे रहे हैं। एक जानकार सूत्र का कहना है कि बीबी (नेतन्याहू) इस बारे में ट्रंप को रोज फोन करते हैं।' टकर कार्लसन, अमेरिकी पत्रकार परमाणु हमले का दावा करने वाले टकर कार्लसन कौन हैं? टकर कार्लसन अमेरिका के प्रभावशाली टीवी होस्ट और रूढिवादी पत्रकार हैं और एक वक्त डोनाल्ड ट्रंप के काफी करीबी थे। फरवरी 2026 में जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो उन्होंने ट्रंप से अपना समर्थन वापस ले लिया। टकर कार्लसन फॉक्स न्यूज के सबसे लोकप्रिय टीवी शो 'Tucker Carlson Tonight' के होस्ट थे और उस वक्त वो ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सबसे मुखर आवाज माने जाते थे। फॉक्स न्यूज छोड़ने के बाद उन्होंने एक्स पर अपना शो शुरू किया और लंबे समय तक ट्रंप के 'MAGA' के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक रहे। टकर कार्लसन दक्षिणपंथी विचारधारा के हैं लेकिन युद्ध के खिलाफ रहे हैं। इसीलिए ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद उन्होंने ट्रंप से नाता तोड़ लिया। 'नेतन्याहू पूरी तरह से हताश और घिर चुके हैं' नेतन्याहू पूरी तरह घिर चुके हैं और हताश हैं। पिछले हफ्ते आए चुनाव नतीजों के बाद उनके लिए सरकार बनाना तब तक मुमकिन नहीं है जब तक कि ट्रंप इजरायली राजनीति में सीधे दखल न दें और अन्य पार्टियों के साथ कोई ऐसा समझौता न करा दें जिससे नेतन्याहू को 'नेसेट' (इजरायली संसद) में 61 सीटें मिल सकें। अगर ऐसा नहीं होता है तो उनका प्रधानमंत्री पद जाना तय है और इसके बाद उन्हें बदनामी, जांच और संभवतः जेल का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नेतन्याहू के लिए ट्रंप के करीब बने रहना जरूरी है। उन्हें इस युद्ध की जरूरत है। टकर कार्लसन, अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन ने अपने पोस्ट में कई तरह के और दावे किए हैं। उन्होंने ये भी लिखा है 'हम महीनों से बिना सोचे-समझे इस स्थिति की ओर बढ़ते आ रहे हैं। फरवरी से अमेरिकी प्रशासन ने चुपचाप अपनी परमाणु नीति (न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन) में बदलाव किया है ताकि 'बैटलफील्ड न्यूक्स' (युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने वाले छोटे परमाणु हथियार) का इस्तेमाल करना आसान हो जाए और इसकी संभावना बढ़ जाए। वाशिंगटन में किसी भी पार्टी के नेताओं को इससे कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है। अब हम इस तबाही के बिल्कुल मुहाने पर खड़े हैं।' 'ईरान पर हमले का दबाव बना रहे नेतन्याहू' टकर कार्लसन के अलावा अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप से ईरान हमले को लेकर बेहद गोपनीय बातचीत की है। इसमें उन्होंने ट्रंप से आग्रह किया है कि मध्यावधि चुनाव के ठीक बाद ईरान पर हमले फिर से शुरू किए जाएं। ट्रंप ने नेतन्याहू से हुई इस बातचीत को 'काफी अच्छा' बताया है। हालांकि ट्रंप ने ये भी कहा है कि ईरान क साथ बातचीत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है और वो जल्दबाजी में कोई कदम उठाना नहीं चाहते हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर के मध्यस्थ पिछले 8 महीनों से चल रहे इस संघर्ष को खत्म करने के लिए एक समझौते पर काम कर रहे हैं। इसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाना शामिल है। इस बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर फिर से हमला होता है तो वो ऐसा जवाब देगा जिसकी कल्पना तक किसी ने नहीं की होगी। ईरान ने साफ कर दिया है कि हमले की स्थिति में वो मिडिल ईस्ट के देशों पर फिर से हमला करेगा। लेखक के बारे में अभिजात शेखर आजाद अभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है। अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है। विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख। पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है। पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए 'बेस्ट राइटर' अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है। अभिजात के खास इंटरव्यू: अभिजात शेखर आजाद का 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं। ... और पढ़ें