News यूरोप में युवाओं का उबाल, फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन तो जर्मनी में लूटपाट और हिंसा यूरोप में शिक्षा, महंगाई और बेरोजगारी से नाराज युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखा। फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए, जबकि ...और पढ़ें यूरोप में विरोध प्रदर्शन। (फाइल फोटो।) HighLights यूरोप में शिक्षा, महंगाई, बेरोजगारी पर युवाओं का गुस्सा सड़कों पर। फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, जर्मनी में लूटपाट और हिंसा हुई। पुर्तगाल, नीदरलैंड में भी युवा आंदोलन, कई गिरफ्तारियां हुईं। जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। शिक्षा, महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों से नाराज युवाओं का गुस्सा अब यूरोप के कई देशों में सड़कों पर दिखाई देने लगा है। फ्रांस में लगातार तीसरे शनिवार बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, वहीं जर्मनी, पुर्तगाल और नीदरलैंड में भी युवा आंदोलन में शामिल हुए। हालांकि, फ्रांस में प्रदर्शन पिछले दो सप्ताह के मुकाबले काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, जबकि जर्मनी के कुछ शहरों में आंदोलन हिंसक हो गया। फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शनकारियों के बीच शामिल उपद्रवियों ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की, यहां तक कि एक बंदूक की दुकान से हथियार भी उठा लिए। फ्रांस में हैलोवीन की पोशाकों में पहुंचे प्रदर्शनकारी एपी के अनुसार, फ्रांस में हैलोवीन के मौके पर कई प्रदर्शनकारी डरावनी पोशाकें पहनकर सड़कों पर उतरे। पुलिस को आशंका थी कि ऐसी पोशाकों के कारण हिंसा करने वालों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, देशभर में करीब 3.20 लाख लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। गृह मंत्री लारेंट नुनेज ने बताया कि सुरक्षा और निगरानी के लिए 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। शहरों के ऊपर हेलीकाप्टर से भी नजर रखी गई। प्रदर्शन में छात्रों, जलवायु कार्यकर्ताओं, मजदूर संगठनों और महंगाई से परेशान लोगों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। हालांकि, देर शाम कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों के समूह हिंसक हो गए। पुलिस पर बोतलें और पटाखे फेंके गए, जिसके जवाब में आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया। देर रात तक 560 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर थी। जर्मनी में दुकानों से हथियार लूटे जर्मनी में 'जेन-जी रीगेल्ट' यानी 'जेन-जी संभाल लेंगे' के बैनर तले 30 शहरों में प्रदर्शन हुए। युवाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु संरक्षण और सस्ता जीवनयापन सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही अनिवार्य सैन्य सेवा की वापसी का विरोध किया। रायटर के मुताबिक, फ्रैंकफर्ट में उपद्रवियों ने 17 दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। एक बंदूक की दुकान से कई हथियार भी उठा लिए, जिन्हें पुलिस ने जब्त करने का दावा किया। हिंसा में 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। कोलोन और हैंबर्ग में भी पटाखे, पत्थर और पेट्रोल बम फेंके गए। पुलिस ने पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। उधर, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने रोसियो स्क्वायर में लगाए गए 50 से अधिक टेंट हटा दिए। इस दौरान लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों की भी खबरें आईं। नीदरलैंड में भी हजारों युवाओं ने प्रदर्शन किया। वहां पुलिस की कड़ी निगरानी के बीच आंदोलन अधिकांश जगहों पर शांतिपूर्ण रहा।